Sunday, 25 October 2015

माझंही एक स्वप्न होतं - majhahi ek swapna hota

माझंही एक स्वप्न होतं- वर्गीस कुरियन

"अमूल" हे भारतात सर्वदूरख्यातनाम असं नाव. पावभाजी बरोबरच्या बटरला समानार्थी शब्द म्हणजे "अमूल". अमूलचे वेगवेगळी दुग्धजन्य पदार्थ बाजारात लोकप्रिय आहे. त्याचप्रमाणे अमूल ने शेतकऱ्यांना, खेडूतांना एकत्र आणून रोजगार निर्मिती केली हेही तितकंच महत्त्वपूर्ण आहे.

हे पुस्तक "अमूल" च्या जन्माची आणि वाढीची कथा आहे. सरकारी पातळीवरची आस्था-अनास्था, परदेशी कंपन्याची स्पर्धा, नवीन तंत्रज्ञान निर्मितीचं आव्हान अशा नागमोडी वाटेवर प्रवास करत अमूल कशी नावारुपाला आली याची ही कथा.

अतिशय प्रेरणादायी चरित्र.
तुम्ही जर बरोबर असाल तर संघर्ष करण्याची तयारी ठेवा यश मिळेल हे बिंबवणारे चरित्र.

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मी दिलेली पुस्तक श्रेणी  :- आवा ( आवर्जून वाचा )
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आवा ( आवर्जून वाचा )
जवा ( जमल्यास वाचा )
वाठीनावाठी ( वाचलं तर ठीक नाही वाचलं तरी ठीक )
ना
वाठी ( नाही वाचलं तरी ठीक  )
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तांडव-taandav

महाबळेश्वर सैल यांची तांडव ही कादंबरी आपल्याला त्या काळातल्या गोव्यात घेऊन जाते जेव्हा पोर्तुगीज आक्रमण गोव्यावर नव्यानेच होत असतं. साम-दाम-दंड-भेद वापरून पोर्तुगीज धर्मान्तर कसे राहिले याचं चित्रण आहे.

आत्तापर्यंत झालेली आक्रमणं लढाया या राजकीय असायच्या सांस्कृतिक किंवा धार्मिक नाहीत. त्यामुळे अशा आक्रमणासाठी जणू समाज गाफिल होता. धार्मिक रुढींचा पगडा, जातिपातित विभागलेला समाज, वर्षानुवर्षांच्या स्थैर्याने लढाऊ पणा विसरलेला समाज म्हणजे धर्मवेड्या, क्रूर आणि सशस्त्र पोर्तुगीजांसाठी सोपा घास ठरू लागला.

देवळे पाडली गेली. देवच त्या गोऱ्या माकडाना शिक्षा करेल असं म्हणत चरफडण्याशिवाय पर्याय नव्हता. कोणी परागंदा झाले. गावाच्या सामाईक जमिनीच्या वारसा हक्क मिळावा म्हणुन लाचारिने कोणी ख्रिश्चन झाले. ख्रिश्चन झालेल्याशी चुकून सम्बन्ध आला तर आपण बाटलो,आता आपण हिन्दू नाही असा स्वतःचाच समज करुन बाप्तिस्मा घेऊ लागले. भीतीने आपणहूनच हिन्दू धर्माचार सोडत गेले.
एकएक वासा ढळत गेला.

नक्की वाचण्यासारखं आहे हे पुस्तक.

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मी दिलेली पुस्तक श्रेणी  :- आवा ( आवर्जून वाचा )
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आवा ( आवर्जून वाचा )
जवा ( जमल्यास वाचा )
वाठीनावाठी ( वाचलं तर ठीक नाही वाचलं तरी ठीक )
ना
वाठी ( नाही वाचलं तरी ठीक  )
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અકૂપાર-अकूपार-Akoopar



गीरच्या जंगलावरचं हे पुस्तक मी गुजराथीतून वाचलं.  एकदम वाचनीय. गीरचं जंगल, त्यातले सिंह,  त्यातल्या वनवासींचे त्यांच्याशी असलेले प्रेमाचे संबंध या सगळ्याचं चित्रण आपल्याला गीरलाच घेऊन जातो.

निसर्गातली आव्हानं, वनवासींनी त्याच्याशी जुळवून घेत-एकरूप होत घडवलेली जीवनशैली माझ्या सारख्या शहरी व्यक्तीलाही अंतर्मुख करते.

या पुस्तकाचं मराठी भाषांतरही उपलब्ध आहे. ते मी वाचलं नाही. पण मूळ गुजराथी पुस्तकच शक्य असेल त्यांनी वाचावं

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मी दिलेली पुस्तक श्रेणी  :- आवा ( आवर्जून वाचा )
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आवा ( आवर्जून वाचा )
जवा ( जमल्यास वाचा )
वाठीनावाठी ( वाचलं तर ठीक नाही वाचलं तरी ठीक )
ना
वाठी ( नाही वाचलं तरी ठीक  )
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हिंदू:जगण्याची समृद्ध अडगळ Hindu: Jaganyachi sammruddh adagal



अतिशय कंटाळवाणं. का लिहिलंय तेच कळत नाही. आणि आपण का वाचतोय ते कळत नाही.

गावा गावात घडणाऱ्या रिकामटेकड्या पारावरच्या गप्पा  रेकोर्ड करून लिहून काढल्या आहेत असं वाटतं.
त्या तात्पुरत्या मनोरंजक वाटतात पण त्यातून हाती काही लागत नाही. आणि या गप्पा पण कुठलाही आगापिछा नाही सूत्र नाही अशा पद्धतीने मांडल्याने एखाद्या गावकऱ्याची दारूच्या नशेत केलेली असंबद्ध बडबड वाटते.

एकूणच हे पुस्तकच "वाचनालयातील एक असमृद्ध अडगळ" आहे.

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मी दिलेली पुस्तक श्रेणी  :- नावाठी ( नाही वाचलं तरी ठीक  )
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आवा ( आवर्जून वाचा )
जवा ( जमल्यास वाचा )
वाठीनावाठी ( वाचलं तर ठीक नाही वाचलं तरी ठीक )
ना
वाठी ( नाही वाचलं तरी ठीक  )
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गेशा ऑफ गिओन Geisha of Gion



गेशा म्हणजे जपान मधील नर्तिका. आपल्याकडे बऱ्याच वेळा गैरसमजापोटी त्यांना वेश्या समजलं जातं. माझाही हा गैरसमज या पुस्यकाच्या वाचनातून दूर झाला.

त्या जपानी पारंपारिक चहापानाच्या प्रसंगी पाहुण्यांना आदबीने चहा देणे, त्यांच्याशी गप्पा मारून वातावरण प्रसन्न करणे, पारंपारिक नृत्त्य सादर करणे हा त्यांचा व्यवसाय.
त्यासाठी या मुलींना लहानपणा पासून अतिशय कठोर मेहनत करावी लागते. आतिशय वजनदार वस्त्र प्रावरणं (किमोनो) अंगावर घालावी लागतात. तासन्‌तास चालणारा मेकप आणि केशभूषा संभाळावी लागते.  नाच शिकण्याचे, सादर करण्याचे अतिशय कडक नियम पाळावे लागतात.

काही जपानी शब्द त्यामुळे लक्षात राहिले आहेत. गेशा, गेको (या गेशा स्वतःला गेको अर्थात नृत्यसेविका म्हाणतात), मिनेको ( लहान गेको), ओचाया (चहापानगृह), ओकाया (या नर्तिकांचं वसतिस्थान), ओकेसान (मोठी बहीण), आतातोरी ( ओकाया प्रमुखाची वारसदार) ई.

एकूणच हे पुस्तक वाचण्यासारखं आहे.

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मी दिलेली पुस्तक श्रेणी  :- आवा ( आवर्जून वाचा )
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आवा ( आवर्जून वाचा )
जवा ( जमल्यास वाचा )
वाठीनावाठी ( वाचलं तर ठीक नाही वाचलं तरी ठीक )
ना
वाठी ( नाही वाचलं तरी ठीक  )
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चिकन सूप फॉर सोल Chicken soup for soul



परिश्रम, सद्द्विचार, संघर्ष, सकारात्मक विचार या बद्दल प्रेरणा देणाऱ्या कथा आहेत यात.
मला हे पुस्तक फार आवडलं नाही. कथा खूपच बाळबोध वाटल्या.  एक दोन पानात लघुकथा/ प्रसंग दिले आहेत त्यामुळे त्या कथांमधलं नाट्य, कंगोरे जाणवत नाही. आशय जो कथा वाचायच्या आधीच कळलेला असतो. पण तो मनाला पुन्हा भिडत नाही.

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मी दिलेली पुस्तक श्रेणी  :- जवा ( जमल्यास वाचा )
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आवा ( आवर्जून वाचा )
जवा ( जमल्यास वाचा )
वाठीनावाठी ( वाचलं तर ठीक नाही वाचलं तरी ठीक )
नावाठी ( नाही वाचलं तरी ठीक )
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The Watson Dynasty वॉटसन डायनॅस्टी

The Watson Dynasty
A book about first and second CEOs of IBM and Father-Son.. Thomas J. Watson and Thomas J. Watson Jr.

A nice to read book. Talks more about nature and behavior of these persons, their interaction with each other and IBM senior employees. It is more about human side of first 50 yrs of IBM.

आयबीएम चे पहिले आणि दुसरे सीईओ -  वॉटसन पितापुत्र - यांच्या बद्दलचं हे पुस्तक आहे. त्यांचे स्वभाव, वागण्याची शैली, विचार करण्याची शैली यातून आयबीएमला कसा आकार येत गेला. "आयबीएम"वर बरा वाईट परीणाम कसा झाला याचा सविस्तर ऊहापोह या पुस्तकात केला आहे.
या पितापुत्रांचे एकमेकांशी, त्यांच्या कुटुंबियांशी  आणि कंपनीतल्या उच्चपदस्थांशी कसे संबंध होते हे यातून उलगडतं. आणि त्यांच्या या स्वभाव घडणीमागे काय कारणं होती याचा शोध घेताघेता त्यांचं चरित्रही आपल्या डोळ्यासमोर उभं राहतं.

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मी दिलेली पुस्तक श्रेणी  :- आवा ( आवर्जून वाचा )
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आवा ( आवर्जून वाचा )
जवा ( जमल्यास वाचा )
वाठीनावाठी ( वाचलं तर ठीक नाही वाचलं तरी ठीक )
नावाठी ( नाही वाचलं तरी ठीक )
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